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रूस की थाली में सजेगा यूपी का आलू! हाथरस और अलीगढ़ के आलू किसानों की खुली किस्मत

रूसी लैब में पास हुई सूर्या और 3797 वैरायटी

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
January 20, 2026
in खेती-किसानी, लेटेस्ट न्यूज
Reading Time: 1 min
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उत्तर प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों के लिए साल 2026 की शुरुआत एक ऐतिहासिक सौगात लेकर आई है। प्रदेश में पैदा होने वाली आलू की दो प्रमुख किस्मों—3797 और सूर्या—ने रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला में कड़े गुणवत्ता परीक्षणों को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। रूस सरकार ने इन किस्मों के आयात को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है, जिससे अब यूपी के आलू के लिए यूरोप और एशिया के बड़े बाजारों के द्वार खुल गए हैं। हालांकि, चिप्सोना किस्म के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतर पाए, लेकिन दो मुख्य वैरायटी की सफलता ने पूरे प्रदेश के किसानों में उत्साह भर दिया है।

किन जिलों की चमकेगी किस्मत?

इस अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौते का सबसे बड़ा फायदा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र के किसानों को मिलने वाला है। विशेष रूप से हाथरस, आगरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद, मथुरा, एटा, कन्नौज, फर्रुखाबाद और कानपुर जैसे जिलों को सीधा लाभ होगा। ये वे जिले हैं जहाँ आलू की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और यहाँ की मिट्टी इन खास किस्मों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

हाथरस को मिला ‘बंपर’ ऑर्डर

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के चेयरमैन अभिषेक देव ने इस बड़ी उपलब्धि की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जैसे ही रूस से हरी झंडी मिली, हाथरस को 3797 वैरायटी के 4 लाख पैकेट का पहला बड़ा निर्यात ऑर्डर मिल गया है। हाथरस के सादाबाद क्षेत्र से इसकी पहली खेप अप्रैल के महीने में रूस के लिए रवाना होगी। निर्यात का यह सिलसिला अप्रैल से शुरू होकर सितंबर तक लगातार जारी रहने की उम्मीद है।

रूस के कड़े मानकों पर जीत

रूस अपनी खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को लेकर बेहद सख्त माना जाता है। पिछले साल यूपी से 3797, सूर्या और चिप्सोना वैरायटी के नमूने जांच के लिए रूसी लैब्स में भेजे गए थे। वहां आलू के आकार, स्वाद, कीटनाशक अवशेष (Pesticide residue) और मिट्टी की गुणवत्ता जैसे कई वैज्ञानिक पैमानों पर इनकी जांच की गई। 3797 और सूर्या इन सभी परीक्षाओं में अव्वल रहे, जिससे अब रूस के लोग यूपी के आलू का स्वाद चख सकेंगे।

कीमतों का गणित: किसानों की आय में 5 गुना तक वृद्धि

इस खबर का सबसे आकर्षक पहलू बाजार भाव में अंतर है। जहाँ उत्तर प्रदेश के स्थानीय बाजारों में आलू की ये किस्में फिलहाल 15 से 20 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रही हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत 100 से 125 रुपये प्रति किलो तक मिलने की संभावना है। कीमतों का यह बड़ा अंतर न केवल किसानों की लागत को कवर करेगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा आर्थिक संबल प्रदान करेगा।

किसानों के शब्द: “यह विश्व मानचित्र पर पहचान का मौका है”

सादाबाद के प्रगतिशील किसान देवेंद्र सिंह और गंभीर सिंह का कहना है कि यह केवल एक व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि यह यूपी के किसानों की कड़ी मेहनत का वैश्विक सम्मान है। साल 2019 में ईरान को आलू भेजने के बाद, अब रूस जैसा बड़ा बाजार मिलना यह साबित करता है कि यूपी का आलू दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि वे अब अपनी फसलों की ग्रेडिंग और गुणवत्ता पर और अधिक ध्यान दें ताकि भविष्य में चिप्सोना जैसी वैरायटी भी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतर सकें।

यूपी से आलू का रूस जाना इस बात का संकेत है कि प्रदेश अब केवल घरेलू आपूर्ति तक सीमित नहीं है। एपिडा और राज्य सरकार के प्रयासों से यदि कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था और दुरुस्त होती है, तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश दुनिया का ‘पोटैटो हब‘ बन सकता है।

Tags: AligarhPotatoPotato ExportRussiaUttar Pradesh
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