भारतीय कृषि में अक्सर देखा गया है कि किसान खून-पसीना एक कर मेहनत करता है, लेकिन ऐन मौके पर ‘नकली बीज’ उसकी पूरी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर देते हैं। इस गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए मोदी सरकार एक ऐतिहासिक सुधार लेकर आई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नए ‘सीड एक्ट 2026’ (Seed Act 2026) की बारीकियों को साझा करते हुए इसे किसानों की सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब बीज बाजार में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता ही सफलता का एकमात्र पैमाना होगी।
ट्रेसिबिलिटी (Traceability): अब हर बीज की मिलेगी ‘कुंडली’
कृषि मंत्री ने बताया कि नए कानून के तहत देश में पहली बार ‘ट्रेसिबिलिटी’ सिस्टम लागू किया जा रहा है।
- QR कोड की ताकत: अब हर बीज के पैकेट पर एक QR कोड होगा। किसान इसे स्कैन करते ही यह जान पाएगा कि बीज कहाँ बना, किस डीलर ने इसे खरीदा और इसे किसने बेचा।
- पारदर्शिता: शिवराज सिंह ने कहा, “हम चाहते हैं कि किसान तक पहुँचने वाले हर दाने की कहानी पारदर्शी हो।“ अगर बीज खराब निकलता है, तो सिस्टम के जरिए तुरंत पता चल जाएगा कि गलती किसकी है और उस पर फौरन कार्रवाई होगी।
सख्त सजा और भारी जुर्माना: 500 रुपये से सीधा 30 लाख!
पुराने कानून की सबसे बड़ी कमजोरी सजा का कम होना थी। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 1966 के कानून में लापरवाही करने वालों पर महज 500 रुपये का जुर्माना था, जिससे कंपनियां डरती नहीं थीं। लेकिन नए एक्ट में:
- जुर्माना: अब घटिया बीज बेचने पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना देना होगा।
- सजा: यदि कोई जानबूझकर धोखाधड़ी करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
मंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी, “सब कंपनियां खराब नहीं हैं, लेकिन जो किसान का भविष्य दांव पर लगाएगी, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”
परंपरागत बीज व्यवस्था पर कोई आंच नहीं
नए कानून को लेकर किसानों और बीज बचाओ कार्यकर्ताओं के मन में एक बड़ा भ्रम था कि क्या इससे किसानों के अपने बीज विनिमय पर रोक लगेगी? शिवराज सिंह ने इसे पूरी तरह साफ करते हुए कहा कि परंपरागत बीज प्रणाली पहले की तरह ही सुरक्षित रहेगी। किसान अपने बीज आपस में बांट सकते हैं, एक-दूसरे को बेच सकते हैं और पारंपरिक ‘सवा गुना’ विनिमय की परंपरा भी जारी रहेगी। कानून का शिकंजा केवल उन कंपनियों और अनधिकृत विक्रेताओं पर होगा जो बाजार में व्यापार कर रहे हैं।
पंजीकरण अनिवार्य: फर्जी कंपनियों का होगा सफाया
अब कोई भी गली-कूचे की कंपनी अनधिकृत रूप से बीज नहीं बेच पाएगी। हर बीज कंपनी को अपना पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य होगा। इससे बाजार से फर्जी और बिना ब्रांड वाली कंपनियां बाहर हो जाएंगी। कृषि मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र (ICAR, कृषि विश्वविद्यालय) और हमारी देसी निजी कंपनियों को और मजबूत बनाया जाएगा ताकि विदेशी बीजों पर निर्भरता कम हो। विदेशी बीजों को भी सख्त मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजरना होगा।
जागरूकता अभियान: गाँवों तक पहुँचेंगे वैज्ञानिक
केवल कानून बनाना काफी नहीं है, किसानों का जागरूक होना भी जरूरी है। इसके लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। देश के सभी 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) अब किसानों को बीजों के चयन और शिकायत निवारण की जानकारी देंगे। वैज्ञानिक सीधे खेतों तक जाकर किसानों को आधुनिक और सही बीज की पहचान करना सिखाएंगे।
राज्यों के अधिकार और आधुनिक तकनीक
1966 का कानून उस दौर का था जब न तकनीक थी और न ही डिजिटल डेटा। शिवराज सिंह ने कहा कि 2026 का कानून डिजिटल इंडिया के विजन पर आधारित है। साथ ही, उन्होंने राज्यों की शंकाओं को दूर करते हुए कहा कि कृषि राज्य का विषय है और राज्य सरकारों के अधिकार पहले की तरह ही बने रहेंगे। केंद्र केवल राज्यों के साथ समन्वय कर इसे प्रभावी ढंग से लागू करेगा।
नया सीड एक्ट केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि हर भारतीय किसान के लिए एक ‘गारंटी कार्ड’ है। गुणवत्तापूर्ण बीज, सख्त सजा और डिजिटल पारदर्शिता के जरिए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अब मिट्टी में बोया गया हर दाना किसान की समृद्धि का कारण बने, न कि उसकी बर्बादी का।




