उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के लिए 5 जनवरी 2026 का दिन कृषि इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। यहाँ के मेहनती किसानों द्वारा उगाया गया आलू अब केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर खाड़ी देशों तक पहुँच चुका है। अलीगढ़ के मथुरा रोड स्थित ‘राशि कोल्ड स्टोरेज’ से आलू की एक बड़ी खेप को कंटेनर के जरिए बहरीन के लिए रवाना किया गया। यह कदम न केवल अलीगढ़ के कृषि उत्पादों की गुणवत्ता पर मुहर लगाता है, बल्कि प्रधानमंत्री के ‘लोकल टू ग्लोबल’ के संकल्प को भी मजबूती देता है।
5 खास किस्में: जो बहरीन के बाजार में मचाएंगी धूम
निर्यात की गई इस खेप की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल आलू की उन्नत प्रजातियां हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में खास तरह के आलू की मांग रहती है, जिसे अलीगढ़ के किसानों ने बखूबी तैयार किया है। बहरीन भेजी गई 29 टन की इस खेप में कुल 5 वैरायटियां शामिल हैं:
- कुफरी सूर्या: अपनी चमक और लंबे समय तक सुरक्षित रहने के गुण के लिए मशहूर।
- फ्राई सोना व फ्राई ओम: ये किस्में मुख्य रूप से चिप्स और फ्रेंच फ्राइज बनाने के लिए दुनिया भर में पसंद की जाती हैं।
- मलबरी ब्यूटी व सुपर सिक्स: अपनी बेहतरीन बनावट और स्वाद के कारण ये किस्में विदेशी ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई हैं।
इन सभी किस्मों को 10 किलो और 25 किलो के आकर्षक बैगों में पैक किया गया है। कुल 2000 बैगों को कंटेनर में लोड कर रवाना किया गया है।
किसानों के खिले चेहरे: आय में हुई रिकॉर्ड वृद्धि
इस निर्यात से सबसे ज्यादा उत्साहित अलीगढ़ के किसान हैं। लाभार्थी किसान भोजराज और बलदेव का कहना है कि स्थानीय मंडियों में अक्सर आलू के दाम गिर जाने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी फसल की वह कीमत मिल रही है जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। किसानों के अनुसार, निर्यात के कारण मिलने वाले बेहतर दाम उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल देंगे। अब उन्हें बिचौलियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और सीधे वैश्विक बाजार का लाभ मिलेगा।
प्रशासनिक मुस्तैदी और विशेषज्ञों की राय
इस सफल निर्यात के पीछे उद्यान विभाग और स्थानीय प्रशासन का बड़ा हाथ है। अलीगढ़ के उद्यान उप निदेशक बलजीत सिंह ने बताया कि विभाग लगातार किसानों को निर्यात योग्य फसल उगाने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित कर रहा था। एएमओ भगवती प्रसाद और राशि कोल्ड स्टोरेज के मैनेजर जितेंद्र के अनुसार, आलू की पैकिंग और ग्रेडिंग में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पूरा ध्यान रखा गया है ताकि बहरीन के बाजार में अलीगढ़ के आलू की विश्वसनीयता बनी रहे।
निर्यात से बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था
अलीगढ़ से शुरू हुआ यह सिलसिला आने वाले समय में अन्य फसलों के लिए भी रास्ते खोलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी क्षेत्र का उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचता है, तो वहाँ का पूरा इकोसिस्टम बदल जाता है। बेहतर कोल्ड स्टोरेज, आधुनिक पैकेजिंग यूनिट और परिवहन के नए साधनों का विकास होता है। अलीगढ़ अब यूपी के ‘पोटैटो हब’ के साथ-साथ एक बड़े ‘एक्सपोर्ट सेंटर’ के रूप में उभर रहा है।
बहरीन को भेजी गई यह 29 टन की खेप तो महज एक शुरुआत है। जिस तरह से अलीगढ़ के किसानों ने कुफरी सूर्या और फ्राई सोना जैसी किस्मों पर मेहनत की है, उसे देखते हुए आने वाले समय में यूरोप और अमेरिका के बाजारों में भी यहाँ का आलू पहुँच सकता है। यह सफलता साबित करती है कि यदि किसान को सही दिशा और बाजार मिल जाए, तो वह अपनी तकदीर खुद लिख सकता है।





