भारतीय खेती को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान 25 विभिन्न फसलों की 184 नई और उन्नत किस्मों को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि भारत अब न केवल अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर चुका है, बल्कि 150.18 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।
बीज विकास की तेज रफ्तार: मोदी सरकार के 11 वर्षों का लेखा-जोखा
केंद्रीय मंत्री ने आंकड़ों के जरिए बताया कि पिछले कुछ वर्षों में देश में बीज अनुसंधान की गति में अभूतपूर्व उछाल आया है। उन्होंने जानकारी दी कि साल 1969 से अब तक कुल 7205 फसल किस्मों को अधिसूचित किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले 11-12 वर्षों के दौरान ही 3236 उच्च उत्पादक किस्में जारी की गई हैं, जो मोदी सरकार की कृषि के प्रति प्राथमिकता को दर्शाती है। इसकी तुलना में 1969 से 2014 के लंबे कालखंड में केवल 3969 किस्में ही अधिसूचित हो पाई थीं। आज जारी की गई 184 किस्में इसी कड़ी का हिस्सा हैं, जो किसानों को बेहतर पैदावार और जलवायु सुरक्षा प्रदान करेंगी।
चुनौतियों का समाधान: सूखे और रोगों से लड़ेंगे ये ‘जादुई’ बीज
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती अब केवल परंपरा नहीं बल्कि विज्ञान है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि विश्वविद्यालयों और निजी संस्थानों के साझा प्रयासों से ऐसी किस्में तैयार की गई हैं, जो कम पानी, बाढ़, और लवणीय (खारी) मिट्टी में भी भरपूर फसल देने की क्षमता रखती हैं। ये ‘स्मार्ट बीज’ बदलते मौसम और जलवायु संकट के बीच किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेंगे। यह ‘लैब से लैंड’ तक की सफल यात्रा का परिणाम है, जिससे खेती की लागत कम होगी और गुणवत्तापूर्ण अनाज उत्पादन बढ़ेगा।
भारत बनेगा दुनिया का ‘फूड बास्केट’
केंद्रीय मंत्री ने गर्व के साथ कहा कि भारत अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। चावल उत्पादन में मिली ऐतिहासिक बढ़त ने भारत को दुनिया के प्रमुख उत्पादक के रूप में स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य भारत को विश्व का ‘फूड बास्केट’ बनाना है, ताकि हम दुनिया की खाद्य जरूरतों को पूरा कर सकें। आत्मनिर्भर भारत के महायज्ञ में कृषि को सबसे मजबूत स्तंभ बताते हुए उन्होंने वैज्ञानिकों और किसानों को इस उपलब्धि का श्रेय दिया।
विविध फसलों की नई सौगात
आज लॉन्च की गई किस्मों में अनाज की फसलों का दबदबा रहा। कुल 122 अनाज किस्में जारी हुईं, जिनमें धान की 60 और मक्का की 50 किस्में शामिल हैं। इसके अलावा दलहन (अरहर, मूंग, उड़द) की 6 और तिलहन की 13 नई किस्में जारी की गई हैं, जो देश को खाद्य तेलों और दालों में आत्मनिर्भर बनाएंगी। पशुपालकों के लिए 11 चारा किस्में और कपास किसानों के लिए 24 नई किस्में (22 बीटी कॉटन सहित) भी इस सूची का हिस्सा हैं। गन्ने की 6, जूट और तंबाकू की 1-1 किस्म भी जारी की गई है।
राष्ट्रीय बीज निगम का बड़ा योगदान
कार्यक्रम के दौरान एक खास अवसर तब आया जब राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) की ओर से 33.26 करोड़ रुपये के लाभांश (Dividend) का चेक मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपा गया। यह चेक NSC की प्रबंध निदेशक डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी ने भेंट किया। इस दौरान कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी मौजूद रहे।
भविष्य का संकल्प: पोषण और सशक्तिकरण
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार अब केवल पेट भरने के लिए अनाज नहीं, बल्कि पोषण युक्त आहार (Biofortified crops) के उत्पादन पर जोर दे रही है। आने वाले समय में जल संरक्षण, पशुपालन और मूल्य संवर्धन (Processing) जैसे क्षेत्रों को और मजबूती दी जाएगी ताकि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके। यह नई बीज क्रांति ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम है।





