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इंदौर में स्वच्छता के दावों की खुली पोल: दूषित पानी पीने से 8 की मौत, पूरे इलाके में मातम!

पाइपलाइन में लीकेज से घुला टॉयलेट का गंदा पानी

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
December 31, 2025
in सेहत
Reading Time: 1 min
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इंदौर, जो लगातार कई वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव हासिल कर रहा है, वहां से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति के कारण अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। जिसे लोग नर्मदा का शुद्ध जल समझकर पी रहे थे, वह असल में मौत का कारण बन गया। इस घटना ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि ऊपरी चमक-धमक के पीछे बुनियादी ढांचा कितना कमजोर हो सकता है।

कैसे शुरू हुआ मौत का सिलसिला?

घटना की शुरुआत भागीरथपुरा की तंग बस्तियों से हुई, जहां अचानक एक के बाद एक लोग गंभीर रूप से बीमार होने लगे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, नल से आने वाले पानी का सेवन करते ही लोगों को पेट में मरोड़, तेज दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायतें शुरू हो गईं। देखते ही देखते मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई कि स्थानीय अस्पतालों में पैर रखने की जगह नहीं बची। डॉक्टरों ने इसे ‘एक्यूट वॉटर-बोर्न इंफेक्शन’ (गंभीर जलजनित संक्रमण) करार दिया है। मरने वालों में बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है।

जांच में हुआ भयावह खुलासा: पाइपलाइन में था ‘मौत का लीकेज’

नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। जांच टीम ने पाया कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के समीप स्थित एक शौचालय (टॉयलेट) के ठीक नीचे से नर्मदा जल की मुख्य सप्लाई लाइन गुजर रही थी। इस पाइपलाइन में हुए एक लीकेज के कारण टॉयलेट का दूषित पानी सीधे पीने योग्य पानी में मिल रहा था।

हैरानी की बात यह है कि जिस पाइपलाइन से हजारों लोगों की प्यास बुझती है, उसके ऊपर निर्माण कार्य की अनुमति कैसे दी गई? लीकेज लंबे समय से हो रहा था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे तब तक नजरअंदाज किया जब तक कि मौत का तांडव शुरू नहीं हो गया।

अस्पतालों की स्थिति और मरीजों का हाल

भागीरथपुरा की गलियों में फिलहाल सन्नाटा पसरा है और लोग नल का पानी छूने से भी कतरा रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने अब बाजार से खरीदे गए बोतलबंद पानी पर निर्भरता बढ़ा दी है। सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। ओआरएस (ORS) और आवश्यक दवाइयों की कमी न हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त टीमें तैनात की हैं।

प्रशासनिक गाज: 3 अधिकारी निलंबित, जांच तेज

इस बड़ी लापरवाही पर मुख्यमंत्री और स्थानीय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शुरुआती जांच के आधार पर नगर निगम के 3 संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की गहराई से जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया है, जो यह पता लगाएगी कि पाइपलाइन के रखरखाव में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।

नगर निगम ने फिलहाल प्रभावित इलाके में नल की सप्लाई रोक दी है और टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं ताकि कोई भी बीमार इलाज से वंचित न रहे।

इंदौर की यह घटना एक कड़वी चेतावनी है। केवल सड़कों की सफाई और कचरा प्रबंधन ही स्वच्छता नहीं है; सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना किसी भी नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह त्रासदी सिखाती है कि जब तक जमीन के नीचे बिछाया गया पाइपलाइनों का जाल सुरक्षित और आधुनिक नहीं होगा, तब तक कोई भी शहर खुद को पूरी तरह ‘स्मार्ट’ या ‘स्वच्छ’ नहीं कह सकता। भागीरथपुरा के पीड़ित परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में किसी और को ‘अमृत’ के नाम पर ‘जहर’ न पीना पड़े।

सावधानी और बचाव (पाठकों के लिए नोट):

  • पानी को हमेशा उबालकर पिएं, खासकर मानसून या संक्रमण के दौरान।
  • यदि पानी के रंग या गंध में बदलाव महसूस हो, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
  • किसी भी प्रकार के पेट दर्द या उल्टी की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
Tags: CM Mohan YadavIndoremadhya pradeshNarmada RiverWater SupplyWater Tragedy
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