ज्ञान की भूमि बोधगया से अब एक और नई रोशनी फैल रही है, और यह रोशनी है ‘स्वास्थ्य और स्वावलंबन’ की। बिहार के गया जिले में ‘जीविका दीदी’ के रूप में पहचान बनाने वाली पुष्पलता ने अपनी दूरगामी सोच से पारंपरिक मिठाई उद्योग में क्रांति ला दी है। उन्होंने चीनी के हानिकारक विकल्पों को छोड़कर प्रकृति के एक अनमोल उपहार ‘नीरा’ (खजूर का ताजा रस) को मिठाई का मुख्य आधार बनाया है। उनके द्वारा तैयार की गई ये मिठाइयां अब केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि एक ‘हेल्थ सप्लीमेंट’ के रूप में भी पसंद की जा रही हैं।
नीरा: नशा नहीं, सेहत का अमृत
आमतौर पर नीरा को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां रही हैं, लेकिन पुष्पलता और उनके जीविका समूह की महिलाएं इस भ्रम को तोड़ रही हैं। वे लोगों को समझा रही हैं कि सूर्योदय से पहले खजूर या ताड़ के पेड़ से निकाला गया रस ‘नीरा’ पूरी तरह से प्राकृतिक, पौष्टिक और नशामुक्त होता है। पुष्पलता ने इसी नीरा का इस्तेमाल कर लड्डू, पेड़ा और तिलकुट जैसी मिठाइयां तैयार की हैं। चूंकि इसमें कृत्रिम चीनी का उपयोग शून्य है, इसलिए यह मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है।
सरस मेले में आकर्षण का केंद्र
राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित ‘बिहार सरस मेला’ में पुष्पलता का स्टॉल इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मेले में आने वाला हर दूसरा व्यक्ति इस ‘शुगर-फ्री’ मिठाई का स्वाद लेने के लिए रुक रहा है। यहाँ न केवल मिठाइयों की बिक्री हो रही है, बल्कि लोग इस बात को लेकर भी उत्साहित हैं कि कैसे एक ग्रामीण महिला ने वैज्ञानिक सोच के साथ पारंपरिक व्यंजनों को नया रूप दिया है। मेले के दौरान स्टॉल पर रोजाना 10 हजार से 20 हजार रुपये तक की शानदार बिक्री दर्ज की जा रही है।
लोकल टू ग्लोबल: सात समंदर पार तक पहुँच
पुष्पलता की मेहनत का रंग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखने लगा है। बोधगया में महाबोधि मंदिर के पास उनकी एक स्थायी दुकान है, जहाँ हर साल लाखों विदेशी पर्यटक आते हैं। थाईलैंड, जापान, वियतनाम और श्रीलंका जैसे देशों से आने वाले बौद्ध धर्मावलंबी इन नीरा की मिठाइयों को बड़े चाव से खरीदते हैं। विदेशी पर्यटकों के बीच इसकी मांग ने इस स्थानीय उत्पाद को वैश्विक पहचान (Global Identity) दिला दी है। इससे न केवल पुष्पलता का परिवार आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ है, बल्कि उनके साथ जुड़ी अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार के नए द्वार खुले हैं।
मुख्यमंत्री ने भी बढ़ाया उत्साह
पुष्पलता के इस अभिनव प्रयास की गूँज बिहार के गलियारों से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँची है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं पुष्पलता के स्टॉल और दुकान का दौरा कर चुके हैं। 16 अप्रैल 2022 को उन्होंने बोधगया की दुकान पर जाकर इन उत्पादों की सराहना की थी, और फिर 21 जनवरी 2023 को पटना के सरस मेले में भी उन्होंने इस पहल को सराहा। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस तरह के प्रयास बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।
डायबिटीज मरीजों के लिए नई उम्मीद
आज के दौर में जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, ऐसे में पुष्पलता की यह पहल सामाजिक सरोकार से भी जुड़ी है। जो लोग मीठे से परहेज करते हैं, उनके लिए अब अपनी पसंद की मिठाई खाना संभव हो गया है। नीरा में प्राकृतिक मिठास के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विटामिन्स और मिनरल्स भी होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने में मदद करते हैं।
पुष्पलता दीदी की यह कहानी बताती है कि यदि आपके पास एक विचार (Idea) है और उसे धरातल पर उतारने का साहस है, तो सफलता के रास्ते खुद–ब–खुद बन जाते हैं। ‘जीविका‘ समूह के माध्यम से बिहार की हजारों महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हैं, लेकिन पुष्पलता ने स्वाद और सेहत को जोड़कर एक नई मिसाल पेश की है। उनकी यह ‘नीरा वाली मिठाई‘ आने वाले समय में बिहार की एक नई ब्रांड इमेज के रूप में उभरेगी, जो यह संदेश देती है कि ‘लोकल‘ उत्पाद भी ‘ग्लोबल‘ बनने की क्षमता रखते हैं।





