पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य से एक ऐसी खबर आई है जिसने इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की एक भयावह तस्वीर पेश की है। शनिवार की तड़के जब पूरी दुनिया गहरी नींद में थी, तब असम के नागांव जिले में पटरियों पर खून की लकीरें खिंच गईं। सैरांग से नई दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस एक भीषण हादसे का शिकार हो गई, जिसमें सात बेगुनाह हाथियों की जान चली गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रेन के इंजन सहित पांच कोच पटरी से उतर गए, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान पर बन आई थी। हालांकि, सुखद पहलू यह रहा कि इस हादसे में किसी भी मानव जान का नुकसान नहीं हुआ है।
हादसे का घटनाक्रम:
यह दर्दनाक घटना लुमडिंग डिवीजन के अंतर्गत आने वाले जमुनामुख और कांपुर रेलवे स्टेशनों के बीच शनिवार तड़के करीब 2:17 से 2:23 बजे के आसपास हुई। ट्रेन नंबर 20507 (सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस) अपनी सामान्य रफ्तार से गुवाहाटी की ओर बढ़ रही थी। जैसे ही ट्रेन कांपुर इलाके के वन क्षेत्र के करीब पहुँची, हाथियों का एक झुंड अचानक पटरियों पर आ गया। अंधेरे और ट्रेन की तेज गति के कारण लोको पायलट को संभलने का मौका बहुत कम मिला। लोको पायलट ने हाथियों को देखते ही आपातकालीन ब्रेक (Emergency Brakes) लगाए, लेकिन विशालकाय ट्रेन को रुकने में समय लगा और वह सीधे हाथियों के झुंड से जा टकराई।
हाथियों की मौत और तबाही का मंजर:
टक्कर का प्रभाव इतना शक्तिशाली था कि सात हाथियों की मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों और रेल अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल का नजारा अत्यंत विचलित करने वाला था। मृत हाथियों में एक छोटा बच्चा भी शामिल है जो गंभीर रूप से घायल है और जिंदगी की जंग लड़ रहा है। हाथियों के विशाल शरीर से टकराने के बाद राजधानी एक्सप्रेस का इंजन ट्रैक छोड़कर नीचे उतर गया और उसके पीछे लगे पांच कोच भी बेपटरी हो गए। गनीमत यह रही कि कोच पलटे नहीं, अन्यथा मरने वालों का आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता था।
यात्रियों की सुरक्षा और राहत कार्य:
हादसे के तुरंत बाद यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई। रेलवे प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सूचना मिलते ही राहत और बचाव टीमों को मौके पर रवाना किया। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के महाप्रबंधक और लुमडिंग डिवीजन के डीआरएम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी रात में ही घटनास्थल पर पहुँच गए। रेलवे ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि ट्रेन में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं और किसी को भी चोट नहीं आई है।
पटरी से उतरे कोचों में सवार यात्रियों को ट्रेन के पिछले सुरक्षित कोचों में खाली सीटों पर शिफ्ट किया गया। तकनीकी टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त और बेपटरी हुए कोचों को ट्रेन से अलग किया। इसके बाद, ट्रेन को सुरक्षित रूप से गुवाहाटी के लिए रवाना किया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, गुवाहाटी स्टेशन पर ट्रेन में नए कोच जोड़े जाएंगे, जिसके बाद वह दिल्ली के लिए अपनी आगे की यात्रा शुरू करेगी।
वन्यजीव सुरक्षा पर उठते सवाल:
गौरतलब है कि सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस एक नई सेवा है, जिसे इसी साल सितंबर में शुरू किया गया था। असम के जंगल हाथियों के प्राकृतिक गलियारे (Corridors) माने जाते हैं। रेलवे और वन विभाग के बीच समन्वय के बावजूद इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों का कहना है कि एलीफेंट कॉरिडोर वाले इलाकों में ट्रेनों की गति सीमा तय होने के बावजूद हादसों पर लगाम नहीं लग पा रही है।





