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बरेली कृषि विभाग में बड़ा घोटाला! प्राकृतिक खेती के नाम पर 25 लाख की सब्सिडी का ‘खेल’

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
December 18, 2025
in खेती-किसानी
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उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में कृषि विभाग इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और आंतरिक कलह की वजह से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जिले के उप कृषि निदेशक (DDA) कार्यालय में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अभी निलंबित चल रहे उप कृषि निदेशक अभिनंदन सिंह की बहाली का मामला सुलझा भी नहीं था कि प्रभारी उप कृषि निदेशक अमर पाल भी भ्रष्टाचार के जाल में फंसते नजर आ रहे हैं। मामला अब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार तक पहुँच चुका है, जिसके बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है।

प्राकृतिक खेती के नाम पर फर्जीवाड़े का आरोप:

बरेली में ‘प्राकृतिक खेती’ को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा जो बजट आवंटित किया गया था, उसे लेकर भारी अनियमितता की शिकायत दर्ज कराई गई है। मीरगंज तहसील के सतुईया गांव के एक जागरूक किसान मनीष शर्मा ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिले के आंवला और मीरगंज क्षेत्र में लगभग 1650 एकड़ भूमि पर फर्जी तरीके से प्राकृतिक खेती दिखाई गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिना किसी वास्तविक खेती के ही लगभग 25 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी उन लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई, जिन्होंने कभी अपने खेतों में प्राकृतिक खेती की ही नहीं। सरकारी आंकड़ों में इसे सफलतापूर्वक खेती दर्शा दिया गया, जबकि जमीन पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी।

बजट खपाने की मची होड़:

शिकायतकर्ता का कहना है कि बरेली जिले को प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन के लिए कुल 87 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट प्राप्त हुआ था। आरोप है कि विभाग के कुछ अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर 25 लाख रुपये की बंदरबांट कर ली है और अब उनकी नजर शेष बचे बजट पर है। इस शेष धनराशि को भी इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों के जरिए ‘खपाने’ की साजिश रची जा रही है।

अधिकारियों की आपसी खींचतान और टेंडर विवाद:

कृषि विभाग में केवल सब्सिडी का ही खेल नहीं चल रहा, बल्कि टेंडर प्रक्रिया में भी धांधली की बातें सामने आई हैं। कुछ समय पूर्व विभाग के एडीओ मुनेंद्र कुमार सैनी ने भी प्रभारी उप कृषि निदेशक पर गंभीर आरोप लगाए थे। बताया जा रहा है कि डीडीए ने अपने किसी चहेते ठेकेदार की फर्म को लाभ पहुँचाने के लिए नियम विरुद्ध टेंडर जारी कर दिया था। हालांकि, समय रहते मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने सतर्कता दिखाते हुए इस अनियमितता को भांप लिया और उस विवादित टेंडर को निरस्त कर दिया।

मुख्यमंत्री का कड़ा रुख और जांच के निर्देश:

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने तत्काल संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव भास्कर चंद्र कांडपाल ने कृषि निदेशक को इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। शासन के इस सख्त रुख से विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है।

बचाव में उतरे अधिकारी:

दूसरी ओर, आरोपों के केंद्र में रहे अधिकारी अमर पाल फिलहाल लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत करार दिया है। अमर पाल का तर्क है कि प्राकृतिक खेती योजना के तहत अभी तक कोई भुगतान जारी ही नहीं किया गया है, इसलिए भ्रष्टाचार का सवाल ही पैदा नहीं होता। वहीं, संयुक्त कृषि निदेशक दुर्विजय सिंह ने भी इस मामले में अभी तक किसी आधिकारिक जांच की जानकारी होने से इनकार किया है, हालांकि उन्होंने नए उप कृषि निदेशक की तैनाती की पुष्टि की है।

नए नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती:

विभाग में चल रहे इस अंतहीन विवाद को खत्म करने के लिए शासन ने अब जौनपुर के उप कृषि निदेशक हिमांशु पांडेय को बरेली की कमान सौंपी है। अमर पाल को उनके पद से हटा दिया गया है। हिमांशु पांडेय के लिए बरेली की राह आसान नहीं होगी, क्योंकि उन्हें न केवल विभाग की छवि सुधारनी होगी, बल्कि भ्रष्टाचार के लगे इन दागों को धोकर व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाना होगा।

Tags: CM YogiCorruption caseNatural FarmingscamUttar Pradesh
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