भारत की मिट्टी और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को समर्पित, एक अभूतपूर्व राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान—“भारत अन्नशुद्धि पदयात्रा”—ने 2 दिसंबर 2025 को कन्याकुमारी में अपने 4,000 किलोमीटर के सफर का ऐतिहासिक समापन किया। श्रीनगर से शुरू हुई यह पैदल यात्रा, शुद्ध और रसायन-मुक्त भोजन को बढ़ावा देने तथा देश में टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) के लिए जागरूकता फैलाने वाले सबसे प्रभावशाली आंदोलनों में से एक बन गई है।
यह पदयात्रा, जो 26 जून को श्रीनगर के बर्फ़ीले पहाड़ों से शुरू हुई थी, देश की लंबाई को पैदल नापते हुए, कई महीनों तक गाँवों, कस्बों और शहरों से गुज़री और धीरे-धीरे एक सशक्त राष्ट्रीय जनांदोलन का रूप ले लिया।
1. नोएडा के गौरव त्यागी ने किया नेतृत्व
इस कठिन और महत्वाकांक्षी यात्रा का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी गौरव त्यागी ने किया। पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल के दुष्प्रभावों को रेखांकित करना था, और इसके व्यावहारिक समाधान के रूप में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की अनिवार्यता पर जोर देना था।
- 160 दिनों का संकल्प: बारिश हो या चिलचिलाती धूप, गौरव त्यागी ने अपनी टीम के साथ मिलकर लगभग 160 दिनों में यह कठिन सफर पूरा किया। किसानों की बैठकों, छात्रों के साथ संवाद और स्थानीय समुदायों के जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देश के कोने-कोने तक पहुँचाया कि भोजन की शुद्धता पूरे भारत का सामूहिक दायित्व है।

2. 1 लाख से अधिक लोगों तक सीधी पहुँच
‘भारत अन्नशुद्धि पदयात्रा’ की सबसे बड़ी सफलता इसका व्यापक जन-संपर्क रहा। इस अभियान ने देशभर में समाज के हर वर्ग के 1 लाख से अधिक लोगों को सीधे प्रेरित किया।
- किसानों को प्रेरणा: 40,000 से अधिक किसानों को सीधे तौर पर प्राकृतिक खेती की तकनीकों और उसके लाभों के बारे में बताया गया। इस दौरान रासायनिक खादों और कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों पर गहन चर्चा शुरू हुई।
- बच्चों और युवाओं को संदेश: 60,000 से अधिक बच्चों और युवाओं तक शुद्ध भोजन का संदेश पहुँचाया गया। गौरव त्यागी ने स्कूलों में छात्रों को जंक फूड से दूर रहने की सामूहिक शपथ भी दिलाई, जिससे आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने का संकल्प लिया गया।
- सामुदायिक भागीदारी: 10,000 से 15,000 विभिन्न समुदायों के नागरिक भी इस पहल से जुड़े, जिससे यह आंदोलन एक व्यापक सामाजिक सरोकार बन गया।
3. मिट्टी की पवित्रता और स्वास्थ्य की सुरक्षा
यह पदयात्रा केवल रासायनिक मुक्त खेती की बात नहीं करती, बल्कि इसका उद्देश्य मिट्टी की पवित्रता और मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित करना है।
- व्यावहारिक समाधान: यात्रा ने प्राकृतिक और जैविक खेती को केवल एक विचार के रूप में नहीं, बल्कि किसानों के लिए लाभदायक और व्यावहारिक समाधान के रूप में प्रस्तुत किया।
- पीढ़ियों के लिए निवेश: आयोजकों का मानना है कि यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और हमारी मिट्टी की उर्वरता को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है।
4. भविष्य के आंदोलन की नींव
कन्याकुमारी में इस यात्रा का समापन एक अंत नहीं है, बल्कि यह एक नए आंदोलन की शुरुआत है। पदयात्रा का यह संदेश अब पूरे देश में गूंज रहा है, जो व्यापक जागरूकता, नीतिगत सुधारों और ज़मीनी स्तर पर प्रेरक कार्यों की एक मजबूत नींव बन चुका है।
‘भारत अन्नशुद्धि पदयात्रा’ इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब जनता किसी उद्देश्य को ठान लेती है, तो सकारात्मक परिवर्तन संभव है। यह आंदोलन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत का कृषि भविष्य अधिक शुद्ध, सुरक्षित और टिकाऊ दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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