केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कृषि भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के निदेशक मंडल की 33वीं महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर भी उपस्थित रहे।
यह बैठक बागवानी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने, योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता लाने और छोटे किसानों को लाभ पहुँचाने की रणनीति पर केंद्रित थी। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, पारदर्शी और पूरी तरह किसान-केंद्रित होना चाहिए।
1. योजनाओं की समीक्षा: फोकस छोटे किसानों की आय पर
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने NHB द्वारा चलाई जा रही विभिन्न फ्लैगशिप कार्यक्रमों और योजनाओं की गहन समीक्षा की। समीक्षा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इन योजनाओं का वास्तविक लाभ ज़मीनी स्तर पर किसानों तक पहुँचे।
- वाणिज्यिक विकास योजनाएं: बागवानी के वाणिज्यिक विकास और उत्पादन को बढ़ाने वाली योजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई।
- कोल्ड-चेन अवसंरचना: जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए कोल्ड-चेन नेटवर्क के विकास में तेजी लाने पर बल दिया गया।
- क्लस्टर विकास कार्यक्रम (CDP): इस नई पहल की समीक्षा की गई, जिसका उद्देश्य क्षेत्र-विशिष्ट बागवानी क्लस्टरों के माध्यम से उत्पादकता और बाज़ार जुड़ाव को बढ़ाना है।
- क्लीन प्लांट कार्यक्रम: उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए रोग-मुक्त और गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया।
2. पारदर्शिता और समयबद्धता: सब्सिडी में देरी बर्दाश्त नहीं
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सख्त निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की देरी या शिकायत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों को मिलने वाली सब्सिडी भी समय पर वितरित की जानी चाहिए, ताकि छोटे किसान पूंजी की कमी के कारण पिछड़ न जाएँ।
शिवराज सिंह का निर्देश: “योजनाओं से, समान रूप से सभी राज्यों में हमारे छोटे किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुँचना चाहिए। उनकी आय बढ़ना चाहिए, और विशेषकर पूर्वोत्तर के राज्यों के किसानों को भी फायदा मिलना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हमेशा हाशिए पर खड़े किसानों और उन क्षेत्रों को सशक्त करना है जो विकास की दौड़ में पीछे रह गए हैं।
3. ‘सेल्फ लाइफ’ बढ़ाने पर विशेष रणनीति की मांग
बागवानी उत्पादों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। केंद्रीय मंत्री ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए NHB को एक विशेष रणनीति बनाने पर जोर दिया।
- उत्पादों की ‘सेल्फ लाइफ’ (Self-life) बढ़ाना: उन्होंने कहा कि बागवानी उत्पादों के फसलोत्तर प्रबंधन (Post-Harvest Management) पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सके।
- जागरूकता कार्यक्रम: नुकसान से बचने के लिए किसानों को भंडारण, पैकिंग और परिवहन की उन्नत तकनीकों के बारे में बताने हेतु जागरूकता कार्यक्रम (Awareness Program) चलाए जाने चाहिए।
यह रणनीति न केवल किसानों के नुकसान को कम करेगी, बल्कि उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए बाजार में अपने उत्पादों को लंबे समय तक रोके रखने की क्षमता भी प्रदान करेगी।
4. बागवानी क्षेत्र की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने बागवानी क्षेत्र की उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता को वैश्विक मानकों तक ले जाने के लिए कई रणनीतिक सुझाव दिए।
उन्होंने गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री के उत्पादन, फसलोत्तर प्रबंधन में नवाचार और उत्पादकता वृद्धि पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने जोर दिया कि NHB को पूरे समन्वय के साथ किसानों को बाजार, कोल्ड-चेन नेटवर्क और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के अवसरों से जोड़ने वाली व्यवस्था को सुदृढ़ करना जरूरी है।
उन्होंने NHB से आग्रह किया कि वह किसानों के फायदे के लिए राज्यवार और क्षेत्रवार रोडमैप बनाकर पूरी ताकत से श्रेष्ठ कार्य करे।
5. तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन: ज्ञान का प्रसार
बैठक के दौरान, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा तैयार किए गए कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन किया।
- मुख्य विषय: ये प्रकाशन गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस (Good Agricultural Practice), जैविक खेती मॉडल और उन्नत बागवानी तकनीकों पर आधारित हैं।
- लाभ: ये संसाधन देश भर के किसानों, कृषि-उद्यमियों और विशेषज्ञों के लिए एक उपयोगी संदर्भ सामग्री सिद्ध होंगे, जिससे खेती की वैज्ञानिक विधियों का प्रसार होगा।
बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट सहित कृषि और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे क्षेत्रीय दृष्टिकोण और सहभागी संवाद को बल मिला। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अंतर्गत वाणिज्यिक बागवानी के विकास के लिए कार्यरत एक स्वायत्त संगठन है।





