मध्य प्रदेश का खरगोन जिला हमेशा से ही कृषि क्षेत्र में अपनी प्रगतिशीलता के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब कसरावद के एक किसान ने आधुनिक खेती और हरित ऊर्जा (Green Energy) के अद्भुत संगम का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जो पूरे देश के किसानों के लिए एक नई राह खोल रहा है। प्रगतिशील किसान सुरेंद्र पाटीदार ने अपने खेत में जिले का पहला 2 मेगावाट क्षमता वाला सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Power Plant) स्थापित किया है।
यह अनूठी पहल केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना की सफलता को जमीन पर उतारने का जीता-जागता प्रमाण है। इस सोलर प्लांट की स्थापना के बाद, किसान पाटीदार अब खेती के साथ-साथ हर दिन ₹35,000 से ₹40,000 तक की मोटी आय अर्जित कर रहे हैं, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है।
1. 7 करोड़ का निवेश, हरित ऊर्जा का संकल्प
किसान सुरेंद्र पाटीदार ने इस विशाल सोलर प्लांट को स्थापित करने के लिए लगभग सवा 7 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह निवेश न केवल उनकी आधुनिक सोच को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि अब किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता (Urjadata) भी बन रहे हैं।
पाटीदार बताते हैं कि यह सपना पीएम-कुसुम योजना के तहत मिले सरकारी समर्थन और प्रोत्साहन के बिना साकार नहीं हो सकता था। यह योजना ग्रामीण भारत को डीज़ल पंपों पर निर्भरता से मुक्त करने और किसानों को ऊर्जा क्षेत्र में एक सक्रिय भागीदार बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
2. बिजली उत्पादन और ग्रिड में आपूर्ति: आय का नया मॉडल
सुरेंद्र पाटीदार का 2 मेगावाट का सोलर प्लांट अब पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि उत्पादित सौर ऊर्जा सीधे सरकारी ग्रिड (Government Grid) में सप्लाई की जा रही है।
- स्थिर आय की गारंटी: सरकारी ग्रिड में बिजली बेचने से किसान को एक निश्चित दर पर और दीर्घकालिक अनुबंध (Long-term Contract) के तहत आय की गारंटी मिलती है। यह मॉडल किसानों को अनिश्चित बाजार जोखिमों से बचाता है।
- दैनिक आय में उछाल: 2 मेगावाट के प्लांट से प्रतिदिन करीब 35 से 40 हजार रुपये की आय हो रही है। इस हिसाब से किसान सुरेंद्र पाटीदार की मासिक आय 10 लाख रुपये से भी ऊपर पहुँच रही है। यह आय पारंपरिक खेती से होने वाली आय से कई गुना अधिक है।
- दोहरा लाभ: अब सुरेंद्र पाटीदार खेती से भी लाभ कमा रहे हैं, और साथ ही अपनी जमीन के एक हिस्से पर बिजली उत्पादन करके भी दोहरा लाभ उठा रहे हैं।
3. पीएम-कुसुम योजना: किसानों को ‘ऊर्जादाता’ बनाने का मंत्र
पीएम-कुसुम योजना का उद्देश्य किसानों को डीज़ल पंपों की जगह सौर ऊर्जा पंप लगाने और अपनी अनुपयोगी या बंजर भूमि पर छोटे ग्रिड-कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट लगाने में मदद करना है।
पाटीदार का यह प्लांट दिखाता है कि योजना के तीन मुख्य स्तंभ (सौर पंप, ग्रिड से जुड़े छोटे प्लांट, और ग्रिड से जुड़े बड़े प्लांट) कितनी प्रभावी तरीके से काम कर सकते हैं। यह योजना किसानों को न केवल अपनी सिंचाई की ज़रूरतों को पूरा करने में आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि उन्हें देश की ऊर्जा सुरक्षा में भी योगदान देने का अवसर देती है।
4. पर्यावरण और कृषि पर सकारात्मक प्रभाव
सुरेंद्र पाटीदार का यह कदम पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा सकारात्मक संदेश है।
- हरित ऊर्जा: सौर ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है।
- पानी की बचत: सोलर पंप लगाने से डीज़ल की ज़रूरत खत्म हो जाती है, साथ ही किसान बिजली की उपलब्धता के आधार पर सिंचाई का बेहतर प्रबंधन कर पाते हैं।
- आधुनिक खेती: बिजली की स्थिर उपलब्धता से किसान अपनी खेती को अधिक आधुनिक उपकरणों और सटीक सिंचाई तकनीकों के साथ जोड़ सकते हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ती है।
5. पूरे भारत के किसानों के लिए प्रेरणा
किसान सुरेंद्र पाटीदार की कहानी अब केवल खरगोन तक सीमित नहीं है। उनकी सफलता देश के उन लाखों किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है जो अपनी आय के सीमित साधनों से जूझ रहे हैं। यह प्लांट यह साबित करता है कि कृषि भूमि का उपयोग अब केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ऊर्जा उत्पादन के हब के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
पाटीदार का मॉडल दिखाता है कि सही सरकारी नीति, किसान की दृढ़ इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का मेल ग्रामीण भारत को कैसे आर्थिक रूप से समृद्ध और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ बना सकता है।





