बॉलीवुड के महानतम अभिनेताओं में से एक, धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से फ़िल्मी जगत ही नहीं, बल्कि खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन से जुड़ा हर व्यक्ति दुखी है। दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाले धर्मेंद्र जी ने अपनी ज़िंदगी के अंतिम वर्षों में मुंबई की चकाचौंध से दूर, महाराष्ट्र के लोनावाला स्थित अपने फार्महाउस को ही अपना सच्चा संसार बना लिया था।
उनके लिए यह फार्महाउस महज़ एक छुट्टी मनाने की जगह नहीं था, बल्कि यह उनके मिट्टी से गहरे जुड़ाव और जैविक खेती के प्रति जुनून का प्रतीक था।
सुपरस्टार से ऑर्गेनिक फार्मर का सफ़र
धर्मेंद्र जी का जन्म पंजाब के एक गाँव में हुआ था, और उनका माटी से प्रेम हमेशा उनके साथ रहा। यही कारण था कि जब उन्होंने सिनेमा से थोड़ी दूरी बनाई, तो उन्होंने पूरी लगन से अपने फार्महाउस पर खेती शुरू कर दी।
- शुद्धता का सिद्धांत: वह अपने फ़ार्म पर पूरी तरह से जैविक खेती (Organic Farming) करते थे। उनका मानना था कि लोगों को बाज़ार में मिलने वाले रसायनों वाले भोजन से दूर रहना चाहिए और शुद्ध, ज़हर-मुक्त खाना उगाना चाहिए।
- देसी तरीक़े और सादगी: वह ट्रैक्टर चलाने से लेकर, खुद हल चलाने और अपने हाथों से ताज़ी सब्ज़ियाँ तोड़ने का काम करते थे। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो अक्सर वायरल होते थे, जहाँ वह पूरी सादगी से धोती-कुर्ता पहने अपने खेतों की जुताई करते दिखते थे।
- प्रकृति से सीधा संवाद: उन्होंने कई बार वीडियो में बताया कि उन्हें अपने पशुओं से बात करने और पक्षियों की आवाज़ सुनने में जो सुकून मिलता है, वह उन्हें किसी भी स्टूडियो में नहीं मिला।
पशुधन और स्वस्थ जीवनशैली पर ज़ोर
धर्मेंद्र जी की जीवनशैली आज के शहरी और तनावपूर्ण जीवन से जूझ रहे लोगों के लिए एक बड़ा सबक थी।
- डेयरी और पशुधन प्रेम: उनके फ़ार्म पर देसी नस्ल की गायें, भैंसें और मुर्गियाँ थीं, जिनकी देखभाल वह किसी डेयरी किसान की तरह व्यक्तिगत रूप से करते थे। वह शुद्ध दूध, दही और ताज़ा पनीर का सेवन करते थे।
- फिटनेस का राज़: 80 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी उनकी फिटनेस का राज़ यही ताज़ा ऑर्गेनिक भोजन और फिजिकल श्रम (शारीरिक मेहनत) था जो उन्हें खेतों में मिलता था।
- लोकल फ़ॉर वोकल: उन्होंने स्थानीय उत्पादकों और किसानों को बढ़ावा देने की बात भी अक्सर कही, जो आज के ‘लोकल फ़ॉर वोकल’ अभियान से पूरी तरह मेल खाती है।
किसानों और युवाओं के लिए एक प्रेरणा
धर्मेंद्र जी ने अपने फ़ार्मिंग के जज़्बे से यह साबित किया कि खेती-किसानी केवल जीविका चलाने का साधन नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक स्वस्थ और समृद्ध तरीका है।
उनका संदेश था: “यह माटी ही सब कुछ है। इसमें पैसा नहीं, लेकिन प्यार, सुकून और खुशबू मिलती है। नई पीढ़ी को खेतों से जुड़ना चाहिए।”
वह अपने वीडियो के माध्यम से किसानों को जैविक खाद बनाने, पानी बचाने और प्रकृति का सम्मान करने के लिए प्रेरित करते रहे।
‘ख़बर किसान की’ परिवार इस महान कलाकार और सरल किसान की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है। भारतीय कृषि के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद किया जाएगा।





