विदिशा (मध्य प्रदेश): दीपावली के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए, विदिशा जिले में गौशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। जिला कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने इस वर्ष के लिए गौशालाओं से कुल 1 करोड़ गौमय दीपक बनाने की अपील की है, जिससे न सिर्फ गौ-सेवा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि गौशालाएं भी आत्मनिर्भर बन सकेंगी। यह पहल गौ-उत्पादों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रशासन देगा पूरा सहयोग, ज़मीन से बाज़ार तक
इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग ने मिलकर पूरी तैयारी कर ली है। विभाग के उप-संचालक डॉ. एन.के. शुक्ला ने बताया कि यह पहल सिर्फ दीपक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गौशालाओं को एक पूरा व्यापार मॉडल प्रदान करेगी। कलेक्टर श्री गुप्ता ने कहा कि इच्छुक गौशालाओं को दीपक बनाने से लेकर उनके विक्रय और विपणन (मार्केटिंग) तक में पूरा सहयोग दिया जाएगा। इसके लिए:
- निःशुल्क प्रशिक्षण: गौशाला संचालकों को दीपक बनाने की पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- कच्चा माल और तकनीक: दीपक बनाने के लिए गौबर का सही मिश्रण और सांचे उपलब्ध कराए जाएंगे।
- विक्रय और विपणन (मार्केटिंग): सबसे महत्वपूर्ण, प्रशासन इन तैयार दीपकों को बाजार तक पहुंचाने और उनके विक्रय में भी पूरा सहयोग देगा, ताकि गौशालाओं को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण
इस पहल को न सिर्फ गौशालाओं की आय बढ़ाने के साधन के तौर पर देखा जा रहा है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। श्री अंशुल गुप्ता ने कहा कि यह पहल गौशालाओं को टिकाऊ आय का स्रोत प्रदान करने के साथ–साथ, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को भी प्रोत्साहित करती है। उन्होंने सभी गौशाला संचालकों से अपील की है कि वे अपने गाँव या ग्राम पंचायत के स्व–सहायता समूहों (Self-Help Groups) को इस कार्य में जोड़ें। इससे ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार मिलेगा और पूरा गाँव मिलकर इस अभियान को सफल बना पाएगा। यह कदम साबित करता है कि गौ–सेवा एक पुण्य कार्य के साथ–साथ एक लाभकारी उद्यम भी हो सकता है।





