भारत भले ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश हो और हाल के वर्षों में उत्पादन के नए रिकॉर्ड स्थापित किए हों, लेकिन अब इसके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बड़ा बयान देकर गेहूं उत्पादकों को चौंका दिया है। उन्होंने कहा है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण देश में गेहूं का उत्पादन घट सकता है।
वैज्ञानिकों के साथ मंथन
केंद्रीय कृषि मंत्री ने ये बातें ग्वालियर में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित 64वें अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि भले ही हम गेहूं उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हों, लेकिन बदलती जलवायु में पैदा हो रही नई चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करना बेहद जरूरी है। उन्होंने वैज्ञानिकों और किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए उस दौर को भी याद किया, जब भारत को अमेरिका से लाल गेहूं आयात करना पड़ता था। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले 10 सालों में वैज्ञानिकों और किसानों की मेहनत से खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
चुनौतियों का मुकाबला करने की तैयारी
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि आने वाले समय की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए ऐसी नई किस्मों को विकसित करना होगा, जो बदलते मौसम को झेल सकें और उत्पादन को लगातार बढ़ा सकें। उन्होंने यह भी बताया कि वैज्ञानिक ऐसी बायो-फोर्टिफाइड किस्में भी विकसित कर रहे हैं, जो पोषण से भरपूर हैं और जिनमें ग्लूटेन की मात्रा कम होती है।
सरकार की भविष्य की योजनाएं
कृषि मंत्री ने भविष्य की योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रबी फसलों की बेहतर पैदावार पर मंथन करने के लिए 14-15 सितंबर को दिल्ली में एक बड़ा रबी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें देश भर के कृषि मंत्री, कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और सरकारी अधिकारी भाग लेंगे। इसके अलावा, वैज्ञानिकों के अनुसंधानों को सीधे खेतों तक पहुँचाने के लिए 3 अक्टूबर से “विकसित कृषि संकल्प अभियान” शुरू किया जाएगा, जो रबी फसलों पर केंद्रित होगा।
बढ़ता उत्पादन, बढ़ती चिंता
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, भारत का गेहूं उत्पादन पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ा है। साल 2022-23 में जहाँ यह 112.18 मिलियन टन था, वहीं 2023-24 में बढ़कर लगभग 114 मिलियन टन हो गया। भारत अपने कुल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा अपनी घरेलू खपत में इस्तेमाल करता है। इस बढ़ती पैदावार के बावजूद, मंत्री का बयान एक महत्वपूर्ण चेतावनी है जो कृषि क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों की तरफ इशारा करता है।





